शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

बुविप्रा की चर्चा


बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण की बैठक 

वन विभाग के तालाबों से पत्थर 

निकाले जाने की जांच कराई जाये

सागर। बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण की सागर में बैठक सम्पन्न हुई । प्राधिकरण के अध्यक्ष उमेश शुक्ला की अध्यक्षता में सम्पन्न इस बैठक में प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत कार्यो की प्रगति की समीक्षा के साथ बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज की कार्यप्रगति पर आवश्यक चर्चा कर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये ।
स्थानीय कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न बैठक में समिति सदस्यों ने अपेक्षा की कि उनकी अनुशंसा पर जो काम स्वीकृत होते है उनकी प्रगति की जानकारी देते समय अनुशंसा करने वाले प्रतिनिधि का उल्लेख आवश्यक रूप से किया जाये । इसी तरह बुन्देखलखण्ड विशेष पैकेज के जो काम प्राधिकरण के पदाधिकारियों ने देखे है और उनकी कमियों की शिकायत बैठक में दी है तो  उस पर कार्यवाही जरूर हो । साथ ही अगली बैठक में की गई कार्यवाही की जानकारी भी दी जाये ।बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ओरछा में प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत राशि से जो सामुदायिक भवन बनाया गया है उसके रख रखाव के लिये एवं उस भवन का उपयोग सभी कर सके इस हेतु भवन नगर पंचायत को हस्तांतरित किया जाये । बैठक में समिति सदस्यो ने बताया कि टीकमगढ जिले की निवाडी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सेंदरी में बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के तहत वन विभाग ने चार-पांच तलैयों का निर्माण कराया है जिनके पत्थर कतिपय दबंगो ने निकालकर कुओं की जुड़ाई करा ली है । इस संबंध में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इन तालाबों की जांच कराई जाये एवं दोषियों पर कार्यवाही भी हो । पूर्व में बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश राय ने बुन्देखलण्ड विकास प्राधिकरण के द्वारा वित्त वर्ष 2007-08 से लेकर वर्ष 2012-13 तक स्वीकृत कार्यो की प्रगति की जिलावार जानकारी दी । साथ ही बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के अंतर्गत कराये गये कार्यो की जानकारी भी प्राधिकरण सदस्यों को दी । उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2010-11 व वर्ष 2011-13 के जो कार्य अभी पूर्ण नहीं हुए है उनके संबंध में कारण बताओं नोटिस जारी किये जायेगे। आपने यह बताया कि दमोह जिले में बांदकपुर, कुण्डलपुर आदि तीर्थ नगरी संबंधी प्रस्तावों को प्राधिकरण की ओर से शासन को प्रेषित किया गया है और जैसे ही स्वीकृत मिलेगी। सभी सदस्यों को अवगत कराया जायेगा ।

प्रशासन की चौपाल




मगरौन वासियों के लिए 12-12-12 बन गया यादगार दिन

कमिश्नर की रात्रिकालीन चौपाल में
पूरी हुई मुंहमांगी मुरादें

मध्यरात्रि के बाद तक समस्याओं का करते रहे निराकरण

दमोह। दुनिया भर के लिए अहम दिन 12-12-12 दमोह जिले की बटियागढ़ जनपद के ग्राम मगरौन वासियों के लिए भी भरपूर खुशियों भरा यादगार दिन साबित हुआ, इस दिन को मगरौनवासी शायद ही कभी भूलें, क्योंकि इस दिन इस ग्राम में संभाग के मुखिया कमिश्नर  आर.के. माथुर ने अधीनस्थ संभागीय अधिकारियों, दमोह कलेक्टर श्री स्वतंत्र कुमार सिंह के साथ रात में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं के निदान के साथ गांव की बुनियादी सुविधाओं में भी बढ़ौत्तरी कराई। चौपाल में ग्राम मगरौन सहित आसपास के ग्रामवासियों ने 129 आवेदन पंजीकृत कराये जिन पर सुनवाई के दौरान अनेक आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया और जिन आवेदनों के निराकरण के लिए जांच आदि की प्रक्रिया पूर्ण की जानी जरूरी है उन्हें मौके पर उपस्थित संबंधित विभाग के अधिकारियों को समय-सीमा में निराकृत करने सौंपे गये।
12-12-12 का दिन इस गांव में एक तरह से दीवाली के दिन जैसा रहा, कमिश्नर, कलेक्टर का ग्रामवासियों ने जोरदार इस्तकबाल किया। बेटियों के कलश ने रात्रि को जगमग कर दिया। वही बुन्देलखण्ड के परम्परागत बाद्य वाद्य यंत्रों की धुन ने त्यौहारी माहौल बना दिया।
इस अवसर पर कमिश्नर श्री माथुर ने उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मां कलेही के दरबार में बैठे है उनके आर्शीवाद से आप सबकी समस्याओं का निदान अवश्य होगा। इस दौरान प्राप्त आवेदनों की सुनवाई मेें उन्होंने मगरौन की प्राथमिक शाला भवन का नवीनीकरण का कार्य चार में पूर्ण कराने तथा माध्यमिक शाला के विस्तार की कार्यवाही करने, उत्कृष्ट विद्यालय बटियागढ़ में अनियमितताओं की जांच एक हफ्ते में कराने, मगरौन उपस्वास्थ्य केन्द्र में सप्ताह में एक दिन डॉक्टर की ड¬ूटी लगाने, हरदुआ जामशा उपस्वास्थ्य केन्द्र में 7 दिन के अंदर ए.एन.एम. पदस्थ करने, केकड़ा जलाशय से विस्थापित होकर अन्य स्थल पर बसे लोगों को विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित कराने, कनौरा में एक हफ्ते में डी.पी.और कनेक्शन लगाने के निर्देश मौके पर उपस्थित अधिकारियों को दिये तथा ग्रामवासियों को भी आश्वस्त किया कि जिस काम के लिए जो समय-सीमा तय की है वह काम तय सीमा में ही होगा।
इसी तरह हिनौती उद्देशा गांव में बिजली व्यवस्था की व्यवस्थित तरीके से जांच कराने, बेलापुरवा के नवीन 36 बी.पी.एल. कार्डधारियों और रूसन्दों के नवीन 17 बी.पी.एल. कार्डधारियों को तत्काल खाद्यान्न का वितरण कराने, मगरौन के स्वराज भवन में बैंक की स्माल ब्राांच खोलने और 7 दिन में राजस्व निरीक्षक का कार्यालय प्रारंभ करने, मगरौन ग्राम पंचायत भवन मार्च 2013 तक बनवाने, मगरौन में पशु औषधालय खोलने का प्रस्ताव शासन को शीघ्र भिजवाने, बरौदा से भरौठा तक की सड़क एक माह में पूर्ण कराने, मगरौनवासी वृद्धा जगरानी को कुटीर के लिए विशेष प्रकरण बनाकर कुटीर देने, बरौदा की गेंेदारानी पति कड़ोरी के खेत में अंशदान योजना के तहत एक सप्ताह में डी.पी. लगाने के सख्त निर्देश सभी संबंधित अधिकारियों को दिये तथा कार्य पूर्ण करने की जानकारी उन्हें देने के निर्देश दिये।
इस तरह से कमिश्नर श्री माथुर ने चौपाल में विद्युत विभाग संबंधी-8, शिक्षा-6, स्वास्थ्य-3, जनपद-17, बैंक-5, खाद्य-3, पी.एच.ई-3, आर.ई.एस., खनिज, एवं जल संसाधन विभाग से संबंधित प्राप्त-एक-एक आवेदनों पर मौके पर ही सुनवाई कर निराकरण कराया। राजस्व विभाग से संबंधित 60 आवेदन जिनमें अधिकांश बी.पी.एल. सूची में नाम जोड़ने के थे, उनके संबंध में आवेदकों को आश्वस्त किया कि इन पर जांच की जरूरत होती है। अत: परीक्षण उपरांत कार्यवाही की जा सकेगी।

तीन दम्पत्तियों का सम्मान

            इस दौरान चार बेटियों को लाड़ली लक्ष्मी योजना में लाभान्वित करते हुए कमिश्नर श्री माथुर ने जन प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रीय बचत पत्र भेंट किये। इसी तरह एक एवं दो लड़कियों पर परिवार नियोजन अपनाने वाले तीन दम्पत्तियों को भी सार्वजनिक तौर से मंच से शाल श्रीफल से सम्मानित किया। तथा अन्य लोगों को भी इन दम्पत्तियों से प्रेरणा लेने की समझाइश दी। इसी तरह कलेक्टर श्री सिंह ने भी इन दम्पत्तियों द्वारा किये गये कार्य को अनुकरणीय बताते हुए समाज से अपेक्षा की कि बेटी को सहज रूप से अपनाये, बेटियों को अगर हम खत्म करते जायेंगे तो एक समय ऐसा आयेगा जब कोई लड़का बाप नहीं बन पायेगा।
            इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की भी जानकारी दी। मौके पर संभागीय अधिकारियों में संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ.के.के. ताम्रकार, संयुक्त संचालक कृषि कोरी, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास रमनवाल, संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय त्रिपाठी सहित अपर कलेक्टर डॉ.जे.सी.जटिया, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग ए.के. सिंह, एस.डी.एम. राकेश कुशरे, सी.ई.ओ. जनपद आर.के. चौबे सहित विभिन्न विभागों के जिला प्रमुख अधिकारी मौजूद थे।

राजनीति



सांसद ने उठाया दुर्घटनाओं का मामला

रिफायनरी के कामगारों को प्रशिक्षण की सिफारिश

सागर।  बीना स्थित भारत ओमान रिफायनरी में हुई दुर्घटनाओं की जाँच के लिए बहु-संकाय सदस्य समिति गठित की गई थी, जिसने रिफायनरी कामगारों को प्रशिक्षण दिए जाने की सिफारिश की है। लोकसभा में यह जानकारी सांसद भूपेन्द्र सिंह के प्रश्न पर पेट्रोलियम राज्यमंत्री ने दी है। 
सांसद भूपेन्द्र सिंह ने लोकसभा में प्रश्न कर जानना चाहा कि वर्ष 2006 में भारत-ओमान रिफायनरी के निर्माण कार्य के शुरू से लेकर अब तक उन्नीस दुर्घटनाओं में से प्रत्येक की जाँच करने के लिए गठित बहु-संकाय सदस्य समिति द्वारा की गई सिफारिशों का ब्यौरा क्या है? जबाव में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री श्रीमती पी. लक्ष्मी ने बताया है कि बहु-संकाय समिति इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि बीओआरएल में दुर्घटनाओं का मुख्य कारण इन दुर्घटनाओं में शामिल संबंधित व्यक्तियों द्वारा निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं किया जाना था। समिति ने कामगारों को सुरक्षित कार्य प्रक्रियाएँ, उपकरणों का सही प्रयोग तथा निजी सुरक्षा संबंधी उपकरणों का प्रयोग करने संबंधी प्रशिक्षण देने की सिफारिश की है। 
राज्यमंत्री ने भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन से प्राप्त सूचना का उल्लेख कर बताया कि बीओआरएल के कामगारों को नियमित अंतराल पर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, दिन में कार्य आरंभ करने से पहले बीओआरएल के सुरक्षा अधिकारियों द्वारा टूल बाक्स संबंधी व्याख्यान दिए जाते हैं और ऐसा ही ठेकेदार के पर्यवेक्षक द्वारा ठेका कामगारों के लिए किया जाता है। राज्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश और केन्द्र के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण में बीना रिफायनरी में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है। रिफायनरी द्वारा खरीदी गई मोबाइल वैन में वायु गुणवत्ता पर निगरानी रखने की सुविधा है। जिसके द्वारा सीमावर्ती गाँवों में वायु की गुणवत्ता की नियमित रूप से निगरानी की जाती है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है। 





गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

प्रशासन की रोशनी: :टीम बुंदेलखंड



टीम बुंदेलखंड: सर्वहारा वर्ग के असली जनसेवक आयुक्त माथुर

अलख जगाने में जुटे हैं भलाई के लिए

दरिद्र नाराययन की  सेवा के लिए  ही टीम बुंदेलखंड


मनोज शुक्ला

“आयुक्त श्री माथुर शासन के साथ-साथ शासन की कल्याणकारी योजनाओं का भी दर्पण बनकर सरकार की रोशनी दूर-दराज के इलाकों में जरूरतमंदों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं जो साधुवाद के लायक है। गौरतलब है कि टीम बुंदेलखंड संभाग के  सागर, पन्ना,टीकमगढ़, छतरपुर दमोह  जिलों में आगे आयें लाभ उठाएँ की तर्ज पर अलख जागा रही  है।“
ग्रामीण क्षेत्रों में रात्री चौपल लगाकर  कर रहे है समस्याएँ हल 

सागर। सागर जब से संभागीय मुख्यालय बना है, तब से बहुत कम ऐसे संभाग आयुक्त मिले हैं। जिनमें संवेदनशीलता,जनसेवा, सर्वहारा वर्ग की चिंता के साथ असली जनसेवक बनाने की ललक दिखाई दी है। लेकिन यह ललक आयुक्त आरके माथुर में समा चुकी है,वे इस वंचित वर्ग की भलाई के लिए अलख जगाने में जुटे हैं।

        गौरतलब है कि  उनमें  मेरे पत्रकारिता अनुभव के इन 28 वर्षों में गिनती के संभाग आयुक्त देखने मिलें हैं। पत्रकारिता के शुरुआती दौर में सबसे पहले वर्ष 87-88 में विनोद वैश्य से मिलने का मौका मिला,पहले से कोई परिचय नहीं था फिर भी उन्होने एक पीड़ित महिला की व्यथा को गंभीरता से समझा तत्काल मेरे कहने पर कार्रवाई कराई। अब ऐसा देखने नहीं मिलता है,अब केवल बड़े-बड़े लोगों की सिफारिश पर गौर किया जाता है। फिर मिले पी राघवन जिनमें भी संवेदनशीलता कूट-कूटकर  भरी थी वे तो इतने संवेदनशील थे कि पत्र पर कार्रवाई कर देते थे यही नहीं कई बार तो अपने अधिनस्थों से फोन कराके पूँछ लेते थे कि करना क्या है।ऐसा  तो अब असंभव सा लाग्ने लगा है।

       यही नहीं उन्होने अपने सागर कलेक्टर कार्यकाल में भी जो किया वह अविस्मरणीय है एक घटना हुई जिसमें कोतवाली थाने में पीड़ित की रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही थी ऐसे में मेरे कहने पर पीड़ित ने कलेक्टर से शिकायत का मन बना लिया।  समस्या यह थी कि उस समय रात के 11 बज चुके थे। फिर भी मैं पीड़ित को लेकर कलेक्टर निवास पहुँच गया,वे तत्काल अपनी गाड़ी में  बैठाकर थाने आ धमके और समस्या  हल। ऐसे कलेक्टर की अब तो केवल किसी फिल्म में ही कल्पना की जा सकती है। कलेक्टर और कमिश्नर रहे बी आर नायडू को भी संवेदनशील कहते है लेकिन उनसे खास संपर्क का अवसर नहीं मिला उनकी संवेदनशीलता का यहाँ के नेताओं और अन्य ने नाजायज फायदा उठा लिया। तालाब सफाई के बहाने वे इमोशनल अत्याचार के  शिकार हो गए।

         जो उस दौरान उनके अभियान में शामिल थे आज तालाब की संजय ड्राइव के आगे लाखों के बारे न्यारे करने में लगे है। संजय ड्राइव उन नेताओं,बिल्डरों, ठेकेदारों को आज वरदान साबित हो रही है क्योंकि इससे उनकी कमाई के द्वार खुल गए इसलिए वे लोग आज भी सागर लाखा बंजारा झील के नाम पर जनता को गुमराह करने में लगे हैं। ऐतिहासिक का राग आलाप कर अपने-अपने स्वार्थ में लगे हैं। जबकि लाखा बंजारा ने यह तालाब पशुओं को प्यास बुझाने बनवाया था। फिर भी राजनीतिबाज अपने गोरखधंधे में लगे है,समय बदला ऐसे संवेदनशीलों का दौर रुक सा गया। इसमें महत्वपूर्ण भूमिका जनसम्पर्क विभाग ने निभाई अब आईएएस इनकी उँगलियों पर नाचने लगे हैं। इसलिए वे अपने चश्मे का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। यही वह कारण जिससे आइएएस की संवेदनशीलता प्रभावित  हो गयी है,हालांकि कुछेक अपवाद निकल आते हैं जो अपने विचार और अपनी समझ पर काम करने का माद्दा रखते हैं। उनमे इस दौर के बाद भी कुछ अरसे पहले तक एसके वेद शामिल रहे हैं उनकी नजर में अच्छे लिखने वालों की,विचार वालों  को पहचानने की क्षमता थी अपने तरीके से काम करते थे।

पूत के गुण पालना में


         इसके बाद संभाग आयुक्त राजकुमार माथुर ने पिछले वर्ष ज्वाइन किया उन्होने आते ही पूत के गुण पालना में ही दिख जाते है वाली कहावत की झलक दिखला दी थी। धीरे-धीरे उनके विचारों को फलीभूत होते देखने का अवसर मिला। अपनी  कार्यशैली से आमजन को प्रभावित किया,लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना शुरू किया। वे अपने सरकारी निवास पर कुपोषित बच्चों की देखभाल कराते हैं यह इकलौता उदाहरण है किसी कमिश्नर के कार्यकाल का। वे अब लोगों की आस्था के केंद्र बन चुके हैं,जनता उम्मीदें लेकर आती  हैं उन्हें सहजता से हल कर रहे हैं, यदि ऐसे आइएएस जनता को मिलने लगे तो निश्चित तौर पर सर्वहारा वर्ग को बहुत राहत मिलने लगे।

दूर-दराज के इलाकों में रोशनी


         आयुक्त आरके माथुर के अभी कदम रुके नहीं हैं उन्होने एक नई पहल शुरू  की है,जिसका नाम है टीम बुंदेलखंड यह पहल धीरे-धीरे रंग लाने लगी है। करीब एक वर्ष के अनुभव के दौरान  इस पहल का जन्म हुआ है,वह भी सर्वहारा वर्ग की भलाई के लिए यह पहलू उनकी पहल के लिए सार्थक उम्मीदों का भरोसा है क्योंकि शासन की मंशा का आईना ही प्रशासन बनता  है। ऐसे में आयुक्त श्री माथुर शासन के साथ-साथ शासन की कल्याणकारी योजनाओं का भी दर्पण बनकर सरकार की रोशनी दूर-दराज के इलाकों में जरूरतमंदों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं जो साधुवाद के लायक है। गौरतलब है कि टीम बुंदेलखंड संभाग के  सागर, पन्ना,टीकमगढ़, छतरपुर दमोह  जिलों में आगे आयें लाभ उठाएँ कि तर्ज पर अलख जागा रही  है। वे अपने मोबाइल नंबर के साथ ही टीम बुंदेलखंड के संपर्क नंबरों से जरूरतमंदों तक सेवाओं की पहुँच बनाने में कामयाब हो रहे हैं।

पहल-प्रयास अनुकरणीय 
  
          उनकी टीम में पटवारी,पञ्चायत सचिव,आगनबाड़ी कार्यकर्ता,सहायिका,स्वास्थ्य पर्यवेक्षक पुरुष-महिला एमपीडब्ल्यू जनशिक्षक आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। जो सम्पूर्ण ब्लॉक में समन्वय के साथ हितग्राहीमूलक योजनाओं को बखूबी अंजाम तक पहुँचाने में कमिश्नर का साथ सभी निभा रहे हैं। यह पहल- यह प्रयास अनुकरणीय है साथ ही सरकार को ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने की आज बेहद जरूरत भी है। जिससे जनता तक सरकार के भलाई वाले  उपायों  को सराहा जा सके। कमिश्नर आरके माथुर ने बताया कि गांवों के भ्रमण के दौरान महसूस हुआ कि जन्म से लेकर मृत्यु तक की योजनाओं की जानकारी तो है लेकिन वे  लाभ से वंचित हैं। यही नहीं विभागीय कर्मियों तक को सतही जानकारी का उन्हे एहसास हुआ तब वे चिंतित हुये फलस्वरूप टीम बुंदेलखंड बनाने की पहल की है।

          श्री  माथुर का मानना है कि यह टीम जरूरतमंदों को सही राह दिखाएगी,दरिद्रनाराययन कि सेवा के लिए  ही टीम बुंदेलखंड की  यह पहल है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनता योजनाओं का लाभ उठा सकें इसलिए उन्होने पहल टीम बुंदेलखंड  सर्वहारा वर्ग के साथ नाम की आकर्षक पुस्तक में इन वर्गों की योजनाओं को सँजोकर पूरे संभाग को परोसा है। इस सराहनीय प्रयास ने उन्हें सच्चे प्रशासनिक अधिकारी की पहचान दिलाई है गर्भवती महिलाएं,नवजात कन्याएँ,खेतिहरमजदूर,निराश्रित विधवाएँ,फेरीवाले,पशुपालक,बेरोजगार बीपीएलपरिवार,श्रमिक,किसान,विकलांग,कामकाजी महिलाएं जैसी 20 श्रेणियों में विभाजित योजनाओं वाली पुस्तक अपने आप में अनेक योजनाओं को सहेजे है। जो हितग्राहियों को लाभ दिलाने में सक्षम साबित हो रही है।

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

श्रेष्ठ कथा लेखन



डॉ. शरद सिंह का सम्मान

सागर। बुंदेलखंड सागर की साहित्यकार डॉ. सुश्री शरद सिंह को उनके श्रेष्ठ कथालेखन के लिए पटना, बिहार में  साहित्यिक पत्रिका नई धाराद्वारा आयोजित समारोह में नई धारा रचना सम्मानसे सम्मानित किया गया। जिसमें उन्हें पच्चीस हजार रुपए सहित प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं शाल-श्रीफल भेंट किए गए। सूर्यपुरा हाऊस में आयोजित उक्त अवसर पर त्रिपुरा के  पूर्व राज्यपाल प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. महीप सिंह, कवि रामकुमार कृषक एवं कथा लेखिका उषाकिरण खान आदि बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे। इसके पूर्व डॉ. सुश्री शरद सिंह को उनके स्त्रीविमर्श संबंधी लेखन के लिए बुन्देली लोककला संगम संस्थान, शाखा लखनऊ द्वारा प्रतिष्ठित गुरदी देवी सम्मानप्रदान किया गया। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग लखनऊ, उत्तर प्रदेश के प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें स्मृति चिन्ह सहित प्रशस्तिपत्र एवं पांच हजार रुपए की सम्मानराशि भेंट की गई। साहित्य के क्षेत्र में बुंदेलखंड सागर का नाम गौरवान्वित करने के लिए डॉ. शरद सिंह के मित्रों एवं शुभचिन्तकों ने बधाई दी है।


प्रधानमंत्री को लिखा सांसद ने पत्र

सागर जिले को पिछड़ा क्षेत्र अनुदान

निधि में शामिल करने की मांग

सागर। लोकसभा में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री द्वारा दिए गए जबाव के परिपे्रक्ष्य में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे पत्र में सांसद भूपेन्द्र सिंह ने मांग की है कि सागर जिले को पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि स्कीम में शामिल किया जाये।
      लोकसभा में सांसद भूपेन्द्र सिंह ने प्रश्र किया कि यदि बुन्देलखंड क्षेत्र को औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्र में शामिल किया गया है तो उसका ब्यौरा क्या है। जबाव में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री डॉ. एस. जगतरक्षकन ने बताया है कि बुन्देलखंड क्षेत्र के दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिले योजना आयोग की पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के अंतर्गत आते हैं। लोकसभा में मिली उक्त जानकारी के परिपे्रक्ष्य में सांसद भूपेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में लेख किया है कि बुन्देलखंड अत्यंत पिछड़ा हुआ है, जिसमें सागर संभाग के पाँचों जिले सागर, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना शामिल हैं। सागर संभाग में बड़े उद्योग और कारखाने नहीं होने से आर्थिक उन्नति नहीं हो पा रही है।
        इस तथ्य को जानते हुए ही केन्द्र सरकार ने विगत वर्षों में बुन्देलखंड को विशेष पैकेज दिया था। सागर संभाग में आर्थिक और औद्योगिक पिछड़ेपन के जो हालात दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना जिलों में हैं, ठीक  वैसे ही हालात सागर जिले के भी हैं। बावजूद इसके सागर जिला पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के अंतर्गत शामिल नहीं है और यह समझ से परे है कि पिछड़े जिलों की पहचान करने के सरकार के मानदंड क्या हैं। सांसद श्री सिंह ने पत्र में लेख किया है कि चूँकि संतुलित विकास को प्रोत्साहित करने में केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है। अत: सागर जिले को भी पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के अंतर्गत शामिल किया जाये। पत्र की प्रति योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया को भी भेजी गयी है।
  

लूट का प्रकरण दर्ज

सागर। थाना बहेरिया के अप0क्र0 334/12 के तहत धारा 394 ता0हि0 का अपराध दर्ज किया गया है। घटना चकेरी क्षेत्र की है। प्रार्थी साधू पिता मंदे रजक उम्र 46 साल नि0 चकेरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 04 अज्ञात आरोपीगण फरि0 के हाथ व मुंह बांधकर 28 बकरा कीमत 20.000-रु के वाहन मे लादकर ले गए। अज्ञात आरोपियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है।


शनिवार, 8 दिसंबर 2012

राजनीति



बुंदेली को राष्ट्र भाषा बनाने 

लोकसभा में विधेयक प्रस्तुत

सांसद भूपेन्द्र सिंह ने पेश किए चार विधेयक 
 
सागर।  सागर संसदीय क्षेत्र के सांसद भूपेन्द्र सिंह ने बुन्देली भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए अशासकीय विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया है। सांसद श्री सिंह इसके पूर्व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सूचना का अधिकार अधिनियम और मनरेगा अधिनियम में संशोधन कराने के लिए तीन अशासकीय विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत कर चुके हैं।
इस शीतकालीन सत्र में संसद की कार्रवाई में बुन्देली भाषा सहित चारों विधेयक पुरस्थापित करने हेतु शामिल किए गए हैं। बुन्देली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने हेतु प्रस्तुत विधेयक में सांसद भूपेन्द्र सिंह ने बताया है कि भारत एक बहुभाषी देश है और संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को राष्ट्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता दी गई है। ये भाषाएँ क्षेत्र विशेष की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह दुर्भाग्य है कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र में करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली बुन्देली भाषा को अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। बुन्देली भाषा अपने अस्तित्व और गरिमा को बनाए रखने के लिए कठिन संघर्ष कर रही है।
       विधेयक में लेख है कि किसी भी समाज या देश का वैभव उसकी भाषा में रचे गए साहित्य से पहचाना जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, बुन्देली भाषा के इतिहास पर दृष्टिपात करें तो महाकवि जगनिक द्वारा लिखा गया महाकाव्य आल्हखंड बुन्देली में ही लिखा गया था। चन्देलकाल के आगमन से बुन्देली का प्रारंभ माना जाता है। तात्पर्य यह है कि बुन्देली भाषा बोलचाल और लेखन में दो हजार वर्ष पहले भी थी। तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस बुंदेली शब्दों से भरी हुई है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में फैले वृहद बुन्देलखंड क्षेत्र की मातृभाषा बुंदेली है।
      सागर, जबलपुर, ग्वालियर, होशंगाबाद और भोपाल संभाग सहित उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती जिलों में करीब 187934 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बुंदेली भाषा बोलने वालों की संख्या वर्तमान में लगभग 5 करोड़ है। इसी वर्ष 24 फरवरी 2012 को मध्यप्रदेश विधानसभा ने सर्व सम्मति से अशासकीय संकल्प पारित कर बुंदेली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध भारत सरकार को भेजा है।अत: वृहद भूभाग में फै ले बुन्देलखंड क्षेत्र की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बुन्देली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर राष्ट्रभाषा का दर्जा और सम्मान प्रदान करना चाहिए। तभी बुन्देली भाषा के साथ-साथ लोकनृत्यों, लोकगीतों, लोक प्रथाओं और अन्य सांस्कृतिक धरोहरों को विलुप्त होने से बचाया जा सकेगा। 


संघ एवं निगम प्रशासन के बीच वार्ता
 

सागर। नगर निगम एवं कर्मचारी संघ के मध्य नियमितीकरण को लेकर आयुक्त सूर्यभान सिंह एवं संघ के सदस्यों के मध्य आयुक्त कक्ष में संपन्न हुई।
                वार्ता में कर्मचारी संघ की ओर से प्रकाश चुटेले, रामदास वैध, पुरूषोततम धौलपुरी, राजकुमार बिल्थरिया, माधव प्रसाद कटारे, पूरनलाल अहिरवार, कृष्णकुमार चौरसिया, ने आयुक्त के समक्ष में कर्मचारियों के हित हेतु अपने विचार व्यक्त किए। गत 20 वर्षों से दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत् लगभग 250 कर्मचारियों के नियमितीकरण हेतु चर्चा की गई। चर्चा के दौरान आयुक्त सूर्यभान सिंह ने कर्मचारियों के नियमितीरण हेतु समीक्षा हेतु विजय दुबे कार्यपालन यंत्री को समिति का अध्यक्ष बनाया गया। समिति का गठन स्थापना शाखा से अलग होकर कार्य करेगी जिसमें उक्त समिति का दायित्व होगा कि नियमितीेकरण से संबंधित कार्य को पूर्ण करे।
      पांच सदस्य नगर निगम प्रशासन एवं पांच सदस्य कर्मचारी संघ की ओर से नियुक्त किए जाऐंगे। समिति 10 से 15 दिवस के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी उसके तत्काल बाद नियमितीकरण कर दिया जाएगा। समिति की कार्यवाही की समीक्षा स्वयं आयुक्त प्रत्येक दूसरे दिन करेंगे। नियमितीकरण उपरांत जो कर्मचारी शेष रह जाऐंगे उनकी आवश्यकता की पुष्टि परिषद से कराकर पद स्वीकृत कराने की कार्यवाही शासन स्तर से की जाएगी। पद स्वीकृति उपरांत उनका भी नियमितीेरण किया जाएगा। जो कर्मचारी स्वेच्छा से प्रकरण न्यायालय से वापिस कराकर भी नियमितीकरण प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।